कड़ाके की सर्दी के बीच दिल्ली सरकार ने दिल्ली के सरकारी स्कूलों के लिए शीतकालीन अवकाश की घोषणा की है। दिल्ली के सरकारी स्कूलों में 1 जनवरी से 15 जनवरी 2022 तक शीतकालीन अवकाश रहेगा। इस अवधि के दौरान कार्यपत्रकों के माध्यम से ऑनलाइन/ऑफलाइन शिक्षण-अधिगम गतिविधियों का संचालन नहीं किया जाएगा।
पांचवीं कक्षा तक के स्कूल 1-15 जनवरी तक बंद
दिल्ली में दिल्ली सरकार के पांचवीं कक्षा तक के स्कूल 1 जनवरी से 15 जनवरी 2022 तक शीतकालीन अवकाश के तहत बंद रहेंगे। इस संबंध में शिक्षा निदेशालय ने 27 दिसंबर को सर्कुलर जारी किया। शिक्षा निदेशालय के एक सर्कुलर में कहा गया है कि इस अवधि के दौरान कोई भी ऑनलाइन या ऑफलाइन शिक्षण शिक्षण गतिविधि आयोजित नहीं की जा सकती है। हालांकि, शिक्षा निदेशालय ने कहा कि छात्रों की लर्निंग को मजबूत करने में मदद करने के लिए अब तक कवर किए गए शैक्षणिक सत्र के 2021-22 के सलेबस को इस दौरान ब्रेक थ्रू असाइनमेंट के जरिए रिवाइस किया जाएगा।
आंतरिक मूल्यांकन में गिना जाएगा असाइनमेंट
सर्कुलर में कहा गया है कि सर्वोदय विद्यालयों के सभी प्रमुखों को सूचित किया जाता है कि प्री-प्राइमरी और प्राइमरी कक्षाओं (Pre Primary and Primary Classes) के लिए शीतकालीन अवकाश 1-15 जनवरी 2022 तक मनाया जाएगा और वर्कशीट के माध्यम से ऑनलाइन और ऑफलाइन शिक्षण गतिविधियों को नहीं किया जाएगा। हालांकि, छात्रों को अपने सीखने को मजबूत करने में मदद करने के लिए अब तक कवर किए गए शैक्षणिक सत्र 2021-22 के पाठ्यक्रम को असाइनमेंट के माध्यम से इस ब्रेक के दौरान रिवाइस किया जाना है। शिक्षा निदेशालय ने कहा है कि शीतकालीन अवकाश असाइनमेंट या गतिविधियों के मूल्यांकन रिकॉर्ड को ईमानदारी से बनाए रखा जाना चाहिए, क्योंकि वह आंतरिक मूल्यांकन (internal assessment) के लिए गिना जाएगा।
प्रत्येक छात्र पर व्यक्तिगत दिया जाएगा ध्यान
शिक्षा निदेशालय ने क्लास टीचरों को अपनी-अपनी कक्षाओं के छात्रों की ताकत और कमजोरियों को नोट करने का भी निर्देश दिया, ताकि शीतकालीन अवकाश के बाद प्रत्येक छात्र पर व्यक्तिगत ध्यान दिया जा सके। कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामले और प्रदूषण की स्थिति काफी चिंताजनक है, यही वजह है कि दिल्ली सरकार ने अब तक 5वीं तक के स्कूलों को 15 दिनों तक बंद रखने का फैसला लिया है, वहीं दिल्ली में इन दिनों कड़ाके की सर्दी पड़ रही है, शीतलहर और कोहरे से बुरा हाल है, ऐसे में छोटे बच्चों को ध्यान में रख कर यह फैसला लिया गया।